पिता थे बस कंडक्टर, बेटी बनी IPS अफसर, ऐसा रहा यहां तक पुहंचने का सफर

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बचपन में हर बच्चा बड़े हो कर कुछ बनने व देश के लिए कुछ करने का सपना देखता है, लेकिन उसे पूरा करने की हिम्मत कुछ लोग ही करते है। अपने इसी सपने को पूरा करने की हिम्मत ऊना के ठठ्ठल गांव की IPS शालिनी अग्निहोत्री ने की।

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बचपन में ही उन्होंने बड़े होकर पुलिस में जाकर देश की रक्षा करने का सपना देखा था, जिसे उन्होंने अपनी हिम्मत व मेहनत के साथ पूरा किया। पुलिस में भर्ती होने के बाद उन्होंने हिम्मत नही हारी और सर्वश्रेष्ठ IPS ट्रेनी की ट्राफी हासिल की।

बस कंडक्टर की बेटी बनी IPS अफसर

बचपन की घटना को असल जिंदगी में उतारा

दरअसल बचपन में हुई घटनाएँ बालमन पर गहराई से असर करती हैं। जिनमें से कुछ तो ऐसी घटनाएँ भी होती हैं जिनसे हमारी ज़िन्दगी में कई तरह के बदलाव आ जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ हिमाचल प्रदेश में रहने वाली शालिनी (IPS) के साथ।

उनके बचपन की एक घटना कि वज़ह से उन्होंने निश्चय कर लिया था कि उन्हें बड़े होकर IPS बनना है। आइए जानते हैं शालिनी ने IPS बनने का सफ़र कैसे तय किया।

 IPS अधिकारी

मां को एक आदमी ने कहे थे अशब्द

शालिनी अग्निहोत्री (IPS) जब छोटी थीं उस समय की बात है,वे अपनी माँ के साथ उसी बस में यात्रा कर रही थीं, जिस बस में उनके पिताजी कंडक्टर हुआ करते थे। यात्रा से दौरान एक व्यक्ति ने उनकी माँ की सीट के पीछे हाथ रखा हुआ था,जिसकी वज़ह से वे सही से बैठ नहीं पा रही थीं और असुविधा महसूस कर रही थीं।

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उन्होंने उस आदमी से बहुत बार हाथ हटाने के लिए कहा परन्तु वह नहीं माना और कहने लगा-तुम कहाँ कि डीसी हो जो तुम्हारी बात मानें? उसी समय शालिनी (IPS) के बालमन ने विचारा कि ये डीसी कौन होता है?

उसी समय ऑफिसर बनने का किया था निश्चय

ips

क्या ये बहुत ताकतवर होता है जो सब उससे डरते हैं? फिर उन्होंने डीसी के बारे में पता किया कि पुलिस की डयूटी में डीसी का पद क्या होता है,वह क्या काम करता है इत्यादि और तभी निश्चय कर लिया कि वे भविष्य में बड़ी होकर ऐसी ही ऑफिसर बनेंगी तथा ऐसे गुंडों को स बक सिखाएंगी।

शालिनी IPS बनने में अप्रत्यक्ष रूप से उनके माता पिता का भी सहयोग रहा है, क्योंकि उन्होंने कभी अपनी बेटी को कम नहीं समझा, स्वतंत्रता दी और उसकी सारी ज़रूरतों को पूरा किया।

सर्वश्रेष्ठ ट्रेनी होने का मिला खिताब

जब से उन्होंने कुल्लू में पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला तब से वहां पर अपराधियों में इनका काफी डर रहता हैं। उन्होंने नशे के व्यापारियों के खिलाफी काफी अभियान चलाए हैं। इस दौरान उन्होंने दर्जनों अधिकारियों को जेल भी पहुंचाया हैं। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने सर्वश्रेष्ठ ट्रेनी होने का खिताब अपने नाम किया था।

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