Special Parliament session: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश, बिल को लेकर अमित शाह और अखिलेश यादव भिड़े

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Special Parliament session Live: सरकार ने बजट सत्र को आगे बढ़ाते हुए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है। सरकार ने संसद के विशेष सत्र में गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को  तीन नए बिल पेश किए। इसमें पहला बिल महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन विधेयक 2026, दूसरा परिसीमन विधेयक 2026 और तीसरा केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026 शामिल है।

Special Parliament session Live: बिल के पक्ष में पड़े 251 वोट

सरकार ने कहा है कि इन बिलों का मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को तेज़ करना है। मंगलवार (14 अप्रैल, 2026) को केंद्र सरकार ने सांसदों (MP) को बिलों के मसौदे की प्रतियां बांटीं। ये बिल महिला आरक्षण कानून जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ नाम दिया गया है को लागू करने और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने से जुड़े थे। बिलों को पेश किया जाने को लेकर वोटिंग, पक्ष में 251 वोट, विरोध में 185 मत पड़े।

बिल को लेकर सांसदों में तीखी बहस

लोकसभा में तीनों बिलों पर चर्चा शुरू हुई है। बिल के पक्ष में 251 वोट पड़ने के बाद ये चर्चा शुरू हुई है। सरकर की तरफ से केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अुर्जन राम मेघवाल ने प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 पेश करके बहस की शुरुआत की। उन्होंने परिसीमन बिल 2026 भी पेश किया, जिससे विधायी निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने पर चर्चा का रास्ता खुल गया। कार्यवाही के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 पेश किया, जिससे उस दिन के विधायी एजेंडे में एक और बिल जुड़ गया।

सरकार पर साधा निशाना

हालांकि विपक्ष ने इन बिलों के पेश होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने तीनों बिलों का विरोध किया और सदन के भीतर अपनी पार्टी की आपत्तियों को औपचारिक रूप से दर्ज कराया। कांग्रेस सांसद ने कहा, “सरकार संविधान को पूरी तरह से हथियाना चाहती है।” 

समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भी विधेयकों पर आपत्ति जताते हुए आरक्षण ढांचे से मुस्लिम महिलाओं को बाहर रखे जाने पर चिंता व्यक्त की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी सैद्धांतिक रूप से महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन उन्होंने जनगणना कराने में हो रही देरी को लेकर सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने टिप्पणी की, “वे जनगणना में इसलिए देरी कर रहे हैं क्योंकि एक बार जनगणना हो गई, तो हम जाति-आधारित जनगणना की मांग करेंगे और वे ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते।” 

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इस चरण में बिल केवल पेश किए गए हैं, और उन पर चर्चा होना अभी बाकी है। वहीं अखिलेश के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, “देश भर में जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, और इसके बाद हम जाति-आधारित जनगणना भी करवाएंगे। अभी घरों की सूची बनाने का काम चल रहा है; घर किसी खास जाति के नहीं होते। अगर समाजवादी पार्टी की चलती, तो वे घरों को भी कोई जाति का दर्जा दे देते।”

अमित शाह-अखिलेश में तीखी बहस

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान के तहत धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर मुसलमानों के लिए किसी भी तरह का आरक्षण असंवैधानिक है।  इसका तीखा जवाब देते हुए शाह ने पलटवार किया, “हम समाजवादी पार्टी को अपने सारे टिकट मुस्लिम महिलाओं को देने से बिल्कुल नहीं रोक रहे हैं।”  इसके बाद अखिलेश यादव ने मुस्लिम समुदाय के बारे में शाह की टिप्पणियों को “अलोकतांत्रिक” करार दिया। इसका तीखा जवाब देते हुए शाह ने पलटवार किया, “हम समाजवादी पार्टी को अपने सारे टिकट मुस्लिम महिलाओं को देने से बिल्कुल नहीं रोक रहे हैं।” 

 Special Parliament session Live: क्यों लाया जा रहा बिल

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1. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026

इसका मकसद दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य करना है।

2. संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026

इसमें ‘जनसंख्या’ की एक नई परिभाषा पेश की गई है; इसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाना है।

3. परिसीमन बिल, 2026

इसमें लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है। सीटों का बंटवारा फिर से तय किया जाएगा।

बिल से क्या होगा बदलाव

अगर ये तीनों बिल पास हो जाते हैं, तो 2029 के आम चुनावों से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है। ये प्रस्ताव 2023 में पास हुए *नारी शक्ति वंदन अधिनियम* (महिला आरक्षण कानून) पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

पहला अहम प्रस्ताव: लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाना। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं; लेकिन सरकार इस संख्या को बढ़ाकर ज़्यादा से ज़्यादा 850 करना चाहती है, ताकि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

दूसरा अहम प्रस्ताव: सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, जिसका मकसद राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।


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