दस लाख बैंककर्मी आज से 2 दिनों के लिए हड़ताल पर,कई शहरों में कैश किल्लत

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न्यूज डेस्क — वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर देश के सभी सरकारी बैंकों के अलावा कुछ निजी व विदेशी बैंकों के तकरीबन 10 लाख कर्मचारी बुधवार से दो दिनों की हड़ताल पर हैं।इस दौरान बैंक कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं।

विभिन्न राज्यों में इस हड़ताल का असर साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी बैंकों और एटीएम पर ताले लग गए हैं, जिसकी वजह से लोगों को परेशानियों का सामने करना पड़ रहा है।

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दरअसल इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) ने दो फीसदी सैलरी में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है. बैंक यूनियन ज्यादा सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहा है। मांगें पूरी नहीं होने की वजह से पूरे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काम कर रहे कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

वहीं इस हड़ताल से देश की बैंकिंग व्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ने की आशंका है लेकिन इसका सबसे ज्यादा खामियाजा सरकारी बैंकों को उठाना पड़ सकता है। सरकारी क्षेत्र के 17 बैंकों को पिछली तिमाही में 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो चुका है। ये बैंक आगे का काम चलाने के लिए सरकार से अतिरिक्त वित्तीय मदद मांग रहे हैं। ऐसे में दो दिनों की हड़ताल से इन पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। एनपीए वसूली जैसी गतिविधियों पर भी असर होगा।

इस हड़ताल का असर करोड़ों नौकरीपेशा और उनके परिजनों को झेलना पढ़ेगा, क्योंकि निजी और सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने की अंतिम तारीख में खाते में जमा किया जाता है। स्ट्राइक की वजह से सैलरी ट्रांसफर नहीं हो पाएंगी और उन्हें सैलरी मिलने में देरी होगी.सप्ताह के बीच में हड़ताल होने से करोड़ों के चेक और ड्राफ्ट का क्लीयरेंस अटक जाएगा।

देश के कुछ इलाकों में कुछ सप्ताह पहले कैश की बड़ी किल्लत थी, गांवों में ये समस्या कुछ ज्यादा विकराल थी। इस बैंक हड़ताल से ये समस्या और बढ़ सकती है.बैंकिंग हड़ताल से एक दिन में इंडस्ट्री को कई हजार करोड़ का चूना लगता है, क्योंकि इससे कंपनी के अधिकांश लेनदेन ठप पड़ जाते हैं।कैश से होने वाले काम पर हड़ताल का काफी बुरा असर होता है।इस प्रकार की हड़ताल से देश की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

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