LPG Cylinder Price Hike: जून महीने की शुरुआत में ही बढ़ती महंगाई ने आम जनता को एक बार फिर ज़ोर का झटका दिया है। गैस कंपनियों ने एक बार फिर एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमतें बढ़ा दी हैं। गैस कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। जबकि 5 किलोग्राम वाले FTL सिलेंडर की कीमत भी 11 बढ़ा दी है। हालांकि, घरेलू LPG सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।
LPG Cylinder Price Hike: अब कीतने का मिलेगा गैस सिलेंडर
बढ़ी हुई कीमतें सोमवार से लागू हो गई है। नई दरों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 3,113.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। वहीं, कोलकाता में कीमतों में और भी ज़्यादा बढ़ोतरी की गई है, जहां कीमत 53.50 बढ़कर 3,255.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। इसके अलावा तेल मार्केटिंग कंपनियों ने छोटे व्यापारियों और नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 5 किलोग्राम के FTL सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये का इजाफा किया है, जिसके बाद दिल्ली में ये छोटा सिलेंडर अब 821.50 रुपये की नई दर पर मिलेगा। हालांकि, घरेलू LPG सिलेंडरों के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
LPG Cylinder Price Hike: लगातार बढ़ रही एलपीजी की कीमतें
बता दें कि 2026 की शुरुआत से ही कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। दिल्ली में, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत जनवरी में 1,691.50 थी। फरवरी में कीमतों में 49, मार्च में 115, अप्रैल में 195.50 और मई में तो एक ही सिलेंडर पर 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। पिछले छह महीनों में कीमतों में बार-बार हुए बदलावों के बाद, दिल्ली में अब एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3,113.50 तक पहुंच गई है।
LPG Cylinder Price Hike: हाल ही में CNG के बढ़े थे दाम
इससे पहले, दिल्ली और आसपास के इलाकों में CNG की कीमत 2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी। 15 मई से, CNG की कीमतों में चार अलग-अलग बार बदलाव के बाद कुल 6 की बढ़ोतरी हुई है। हाल के हफ़्तों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें भी बढ़ी हैं। पेट्रोल की दरें 7.35 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई हैं, जबकि डीज़ल की कीमतों में कई चरणों में 7.53 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।
क्यों बढ़ रहे ईंधन के दाम
गौरतलब है कि LPG की कीमतों में यह बढ़ोतरी वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते की गई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत इस समय आपूर्ति में रुकावटों और आयात पर बढ़ते खर्च से उत्पन्न भारी दबाव का सामना कर रहा है।
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