जो भक्त जम्मू जाकर दर्शन नहीं कर पाते; उनके लिए यहां वैष्णो रूप में दर्शन देती हैं मां…

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फर्रूखाबाद– वैष्णो मैया तो दूर पहाड़ों पर विराजी हैं, पर कहते हैं कि भक्त बुलाये तो मैया उस तक दौड़ी चली आती हैं. ऐसा साक्षात् यहाँ देखने को मिला है.जो लोग कटरा जाकर मैया के दर्शन नहीं कर पाये उनके लिए मैया फर्रुखाबाद में ही वैष्णो रूप में दर्शन देती हैं.

भक्त  प्रसन्न कर ले तो मैया उसकी झोली भर ही देती हैं. वैष्णो मैया का सच्चा दरबार अपने भक्तों के लिए खुशियां लुटाता है.  नवरात्र में वैष्णो मैया के दरबार में रौनक बढ़ गयी है. भक्तगण अपने ढंग से मैया को मनाने में लगे हैं. फर्रुखाबाद के बीएएमएस डाक्टर राकेश तिवारी की संकल्पना है नगला दीना मोहल्ला में बना वैष्णो देवी मंदिर।

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कटरा में तो ऊंचे- ऊंचे पहाड़ों के बीच मैया का दरबार है. यहाँ के मंदिर में पहाड़ तो नहीं लेकिन मंदिर तक पहुँचने के लिए वैसे ही पर्वतीय मार्ग की चढ़ाई पर चलने का एहसास होता है.डा. तिवारी के अस्पताल से होकर यह चढ़ाई वाला रास्ता निकलता है. जिस पर नाचते- कूदते भक्त मैया के पिंडी स्वरुप के दर्शन के लिए पहुँचते हैं. जो लोग मन से माता की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. माता तो जगत जननी हैं. वह सभी जगह विराजमान हैं. जिन्होंने ऐसे ऐसे चमत्कार किये जिनकी कल्पना उन्होंने सपने में भी नहीं की थी.उनके जीवन में हुए चमत्कारों से ऐसा लगा कि अगर मैया की भक्ति में उतरा जाए तो बहुत कुछ पाया जा सकता है.

जुलाई 1998 को सातवीं मंजिल पर बने मंदिर में वैष्णो माता विराजमान हो गईं. तब से यह साँचा दरबार अपने हर भक्त की मनोकामना  पूरी करता है. वैष्‍णो देवी के अलावा काली देवी , लक्ष्मी  व सरस्वती के स्वरूप व उनके पिंडी रूप भी यहाँ स्थापित हैं। मंदिर के पुजारी प्रभात ने बताया कि प्रतिदिन सुबह 7 बजे के साथ मैया की पूजा शुरू होती है और रात 8 बजे मैया को भोग के साथ शयन आरती होती है. दोनों नवरात्र में हवन-पूजन होता है.नवरात्र में मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है.

(रिपोर्ट-दिलीप कटियार, फर्रूखाबाद)

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