गोण्डा महोत्सव का हुआ समापन, मालिनी अवस्थी ने लोकगीतों से बांधा समां

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गोण्डा– जनपद की गंगा-जमुनी तहजीब तथा जनपद की विरासत को संजोए हुए एवं स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हुए गोण्डा महोत्सव अपने उत्कर्ष पर पहुंचकर चौथे दिन समाप्त हो गया। 

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महोत्सव का समापन शानदार बालीवुड नाइट, पद्मश्री लोकगाकिा मालिनी अवस्थी के गीतों व कुलहिन्द मुशायरे के साथ हुआ । महोत्सव के चौथे और अन्तिम दिन 05.00 बजे सायं पुरस्कार वितरण आयोजन समिति द्वारा, 06.00 बजे रात्रि सांस्कृतिक कार्यक्रम मोहित कपूर डांस पार्टी द्वारा, 06.45 बजे सायंलिटिल चैम्प प्रस्तुति फरहा नाज, 07.15 बजे रात्रि लोक गायन विक्रम विष्ट एण्ड पार्टी तथा 07.45 बजे रात्रि से लोक गायन लोक गायिका मालिनी अवस्थी द्वारा लोकगीतों की झमाझम प्रस्तुति हुई ।

इसके बाद रात्रि 9ः15 बजे से कुलहिन्द मुशायरे का अयोजन हुआ जिसमें जनाब मुनव्वर राणा नई दिल्ली, श्रीमती सबा बलरामपुरी बलरामपुर, जनाब जौहर कानपुरी कानपुर, जनाब अशोक साहिल दिल्ली, जनाब हाशिम फिरोजाबादी फिरोजाबाद, जनाब वसीम रामपुरी रामपुर, जनाब काबिश रुदौलवी फैजाबाद, श्रीमती शबीना अदीब कानपुर, जनाब रुखसार बलरामपुरी लखनऊ, जनाब अली बाराबंकवी बाराबंकी, जनाब विकास बौखल बाराबंकी, जनाब पीके धुत्त एटा, जनाब नदीम फर्रूख ने शिरकत की । मुशायरे का संचालन जनाब नदीम फर्रूख द्वारा किया गया ।

महोत्सव का चैथा और अन्तिम दिन लोक कलाओं से भरा रहा। महोत्सव की आखिरी शाम लोकगायिका मालिनी अवस्थी के नाम रही। मालिनी अवस्थी के स्टेज पर आते ही खचाखच भरा पण्डाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मालिनी अवस्थी ने अपनी प्रस्तुति सबसे पहले देवी गीत देवी मोरी झूलै लौंग की डरिया तथा उड़ि जाव सुगना सरयू पार मनाय लावो देबिन को गाकर देवी वन्दना की। इसके बाद लोकगीतों की परम्परा के तमाम विधाओं के गीत उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए जिस पर दर्शक झूम उठे। उनके द्वारा सोहर बाजत अवध बधइया दशरथ घर सोहर हो, हे रामा घर-घर बाजे ला बधइया हे रामा, रेलिय बैरन पिया को लिये जाय रे, हमरा गुलाबी दुपट््टा, हमे लगि जइहै नजरिया हो, नई झुलनी की छइयां दो घरिया बिताय दा हो, येहि ठइयां मोतिया हेरा गईल रामा, कहवां मैं ढूंढूं। देवी गीत मइया के भावै लाल सेनुरवा हो जगदम्बा मइया, सइयां मिले लरिकइयां मैं का करूं तथा पिया मेंहदी लियाय दा मोती झील से जायके साइकिल से नाय गााकर लोगों का मनमोह लिया तथा पूरे पण्डाल को जीवन्त बना दिया। उनके लोकगीतों की झमाझम प्रस्तुति की गई। जिलाधिकारी जेबी सिंह व उनकी धर्मपत्नी तथा पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार सिंह ने मालिनी अवस्थी को चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

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