Dalai Lama Birthday: दलाई लामा के 90वें जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

150

Dalai Lama Birthday: तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा आज 90 साल के हो गए है। दलाई लामा के जन्मदिन पर दुनियाभर के लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने दलाई लामा को प्रेम, करुणा और धैर्य प्रतीक बताया।

Dalai Lama Birthday :  पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, “मैं 1.4 अरब भारतीयों के साथ मिलकर परम पावन दलाई लामा को उनके 90वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। वे प्रेम, करुणा, धैर्य और नैतिक अनुशासन के चिरस्थायी प्रतीक रहे हैं। उनके संदेश ने सभी धर्मों के लोगों में सम्मान और प्रशंसा की भावना पैदा की है। हम उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करते हैं।”

Dalai Lama ने दिया भावुक संदेश

अपने जन्मदिन पर दलाई लामा ने दुनिया भर में अपने अनुयायियों को एक भावुक संदेश दिया। उन्होंने खुद को एक ‘साधारण बौद्ध भिक्षु’ बताया और करुणा, सद्भाव और आंतरिक शांति के महत्व पर जोर दिया। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित एक समारोह में सैकड़ों अनुयायियों की मौजूदगी में दलाई लामा ने कहा कि भले ही वह व्यक्तिगत रूप से जन्मदिन नहीं मनाते हैं, लेकिन अगर ऐसे अवसरों पर दूसरों के कल्याण के लिए काम किया जाता है तो वह इसे महत्व देते हैं।

इससे पहले तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा ने बड़ा बयान दिया। उत्तराधिकारी के चुनाव और विवाद के बीच दलाई लामा ने शनिवार को कहा- कई भविष्यवाणियों को देखते हुए मुझे लगता है कि मुझ पर अवलोकितेश्वर का आशीर्वाद है। अब मैं 30-40 साल और जीना चाहता हूं। हो सकता है कि मैं 130 से ज्यादा जिऊं। 

Related News
1 of 1,175

दरअसल दलाई लामा का यह बयान उनके उत्तराधिकारी के ऐलान की अफवाहों के बीच आया है। दलाई लामा के जन्मदिन पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 2 जुलाई को 3 दिवसीय 15वां तिब्बती धार्मिक सम्मेलन शुरू हुआ था। यहां उन्होंने कहा था कि मेरे निधन के बाद उत्तराधिकारी का चयन तिब्बती बौद्ध परंपराओं के अनुसार किया जाएगा।

Dalai Lama Birthday : 14वें दलाई लामा

गौरतलब है कि दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता हैं। वर्तमान दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो को 14वां अवतार माना जाता है। उनका जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के तकस्टार गांव में हुआ था। शांति, करुणा और अहिंसा के उनके संदेश के लिए उन्हें पूरी दुनिया में सम्मान दिया जाता है। 1959 में तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद वे भारत में शरणार्थी बन गए और धर्मशाला में रहने लगे। उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।  वे 65 से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुके हैं।


ये भी पढ़ेंः-Viral Girl Monalisa: खूबसूरती’ बनी मुसीबत ! महाकुंभ छोड़ने को मजबूर हुई मोनालिसा

ये भी पढ़ें:-प्रेमी ने प्रेग्नेंट कर छोड़ा, मां-बाप ने घर से निकाला, मसीहा बने दारोगा ने खुशियों से भर दी झोली

(अन्य खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं…)

Comments
Loading...