बेमतलब साबित हो रही 108 की सेवाएं, जरूरत पड़ने पर नहीं मिलती हैं एम्बुलेंस

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महोबा– मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाऐं और बाहर ले जाने के लिये निःशुल्क एम्बुलेंस मुहैया करायी जाती है किन्तु जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते मरीज का तीमारदार एम्बुलेंस के लिये नम्बर लगाता रहा; लेकिन एम्बुलेंस नहीं आ पायी।

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चरखारी कस्बा निवासी सलीम की पत्नी सबीना को प्रसव पीड़ा हुयी तो उसे इलाज के लिये जिला अस्पताल रैफर किया गया। यहां चिकित्सक ने उसकी जांच कर उसे बाहर रैफर कर दिया । एम्बुलेंस के लिये 108 पर कॉल की गयी। कॉल रिसीव तो हुयी लेकिन काफी देर बाद यह कहकर टहला दिया कि गाड़ी उपलब्ध नहीं है। आनन – फानन में एक प्राइवेट गाडी का इंतजाम किया गया। प्राइवेट एम्बुलेंस मे ले जाते समय महिला सबीना की मौत हो गयी। 

सलीम का कहना है कि बाहर ले जाने के लिये 108 एम्बुलेंस के लिये मोबाइल से कॉल की गयी कॉल रिसीब भी हुयी लगभग 45 मिनट तक उसे यह कहकर भरोसा दिलाया जाता रहा कि एम्बुलेंस का पता लगाया जा रहा है और बाद में यह कहकर फोन काट दिया कि एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। पत्नी की मौत हो जाने के बाद सलीम का कहना है कि शासन मरीजो के लिये निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा की बात करती है और बड़े बड़े ढिढौरा पीटे जा रहे है लेकिन उसकी पत्नी अस्पताल में तड़पती रही लेकिन एम्बुलेंस बाहर ले जाने के लिये नहीं मिल सकी। वह तो सिर्फ नाम की एम्बुलेंस होकर रह गयी है ।

(रिपोर्ट – तेजप्रताप सिंह , महोबा )

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