वसंत पंचमी के शाही स्नान पर संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान
Basant Panchami 2026: विश्व प्रसिद्ध प्रयागराज माघ मेले (Magh Mela 2026) के चौथे शाही स्नान पर्व बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर शुक्रवार को पवित्र स्नान जारी। वसंत पंचमी के मौके पर संगम में आस्था का जनसैलाब उमड़ा हुआ है। इस पावन स्नान पर्व पर सुबह 8 बजे तक लगभग 1 करोड़ 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में “हर हर गंगे” और “बम बम भोले नाथ” के जयकारों के साथ डुबकी लगा चुके। बसंत पंचमी को चल रहे चौथे शाही स्नान पर लगभग दो करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
Basant Panchami 2026: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
उधर सुरक्षा कारणों से जल पुलिस, NDRF, SDRF और गोताखोर सभी घाटों पर श्रद्धालुओं से स्नान के बाद जगह खाली करने की लगातार अपील कर रहे हैं। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। संगम के सभी घाटों पर CCTV कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। चौथे स्नान पर्व को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए, पुलिस कमिश्नर प्रयागराज जोगेंद्र कुमार, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, माघ मेला अधिकारी ऋषिराज, पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज कुमार पांडे और अन्य सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ड्यूटी पर हैं।
महाशिवरात्रि तक चलेगा माघ मेला
बता दें कि 44 दिवसीय माघ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस दौरान कई प्रमुख स्नान पर्व और धार्मिक आयोजन होंगे। यह ऐतिहासिक माघ मेला सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सनातन परंपरा, संस्कृति और सुरक्षा व्यवस्था का एक अद्भुत उदाहरण है, जहां प्रशासन करोड़ों श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बताया जा रहा है कि सुबह 10 बजे तक 9 लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगा चुके है।
Magh Mela 2026 Snan-dan: गंगा स्नान-दान का महत्व
माघ मेला में स्नान और दान को विशेष महत्व दिया जाता है। ब्रह्म मुहूर्त को स्नान और दान के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। यह सुबह 5:08 बजे से 6:02 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहता। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, सूर्य देव को जल चढ़ाना और दान-पुण्य करना विशेष महत्व रखता है। दान करने से राहु, केतु और शनि के कारण होने वाले ग्रहों के दोष शांत होते हैं। आप गर्म कपड़े, कंबल, तिल, चारपाई, रजाई और गद्दे दान कर सकते हैं। इससे पूर्वजों को शांति मिलती है। इससे व्यक्ति को सुख, समृद्धि और धन भी मिलता है। कहा जाता है जो व्यक्ति संगम में स्नान और दान-पुण्य करता है, वह अपने जीवन की बाधाओं से मुक्त हो जाता है।
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