वैलेंटाइन डे: आखिर क्यों मनाया जाता है ये ‘प्यार का उत्सव’, यहां जानें….

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न्यूज़ डेस्क–प्रेमी जोड़ों का त्यौहार माना जाने वाला वैलेंटाइन वीक आज अपने पूरे खुमार पर है और इंद्रदेव ने भी इसमें अपना योगदान देते हुए मौसम को काफी खुशनुमा बना दिया है। 

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एक सप्ताह पहले से वैलेटाईन वीक की शुरूआत हो गयी थी। बहुत कम लोग ही जानते होगे कि वैलेटाईन डे की शुरूआत कब और कहा से हुयी थी। अगर बात की जाये वैलेटाईन डे की तो इसके पीछे एक बहुत बडा राज है छिपा है। कहा जाता है रोम के एक पादरी थे संत वैलेटाइन वो दुनिया में प्यार को बढावा देने में मान्यता रखते थें ; लेकिन इसी शहर के एक राजा क्लाॅडियस को उनकी ये बात पसन्द नही थी। राजा को लगता था कि प्रेम व विवाह से पुरूषो की बुद्धि और शक्ति दोनो ही खत्म होती हैं। इसी वजह से उसके राज्य में सैनिक और अधिकारी शादी नही कर सकते थें। लेकिन संत वैलेटाइन ने राजा क्लाॅडियस के इस आदेश का विरोध किया और रोम के लोगो को प्यार और विवाह के लिये प्रेरित किया। इतना ही नही उन्होने कई अधिकारियों और सैनिकों की शादियां भी कराई। इस बात से राजा भडका और उसने संत वैलेटाइन को 14 फरवरी 269 में फासी पर चढवा दिया। उस दिन से हर साल इसी दिन को प्यार के दिन के तौर पर मनाया जाता है। 

वैलेटाईन डे के प्यार का हफ्ता हर साल 7 फरवरी से शुरू होता है और हफ्ते के सातो दिन प्रेमी प्रेमिका एक – दूजे को अलग-अलग गिफ्टस देकर मनाते हैं। वह अपने पार्टनर को कार्ड, चाॅकलेट, गुलाब और गिफ्टस देकर इस दिन को सेलिब्रेट करते है लेकिन बढती टेक्नोलाॅजी ने कार्ड की प्रथा को खत्म सा कर दिया है। इसकी जगह अब ई-कार्ड ने ले ली है। अब लोग फोन पर ही कार्ड की फोटोज या मैसेज भेजकर एक दूसरे केा विश करते है।

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