Nepal Election Results 2026: नेपाल में 5 मार्च, 2026 को हुए ऐतिहासिक आम चुनाव की गिनती जारी है। शुरुआती रुझान देश की राजनीति में एक बड़ी उथल-पुथल का संकेत दे रहे हैं। अब तक के नतीजों और रुझानों में पुरानी और पारंपरिक पार्टियों, खासकर वामपंथी धड़े (कम्युनिस्ट पार्टियों) का सूपड़ा साफ नजर आ रहा है। सितंबर 2025 के ‘Gen Z’ आंदोलन के बाद यह पहला चुनाव है, जिसने KP शर्मा ओली (KP Sharma Oli) की सरकार को हटा दिया था। वहीं युवाओं के भारी समर्थन पर सवार राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) एक मजबूत पार्टी बनकर उभरी है।
Nepal Election Results 2026: बालेन शाह की पार्टी को बढ़त
शुरुआती रुझानों में Gen-Z के हीरो बालेन शाह (Balen Shah) की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) 55 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि नेपाली कांग्रेस 8 सीटों पर आगे है। इसके अलावा CPN UML 4, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी 3 और अन्य दलों ने एक सीट पर आगे चल रही है। उधर बालेंद्र शाह पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व पीएम के.पी. शर्मा ओली से आगे चल रहे हैं।
शुरुआती वोटों की गिनती के मुताबिक, शाह को 1,478 वोट मिले हैं, जबकि ओली को 385 वोट मिले हैं। शाह की बढ़त के अलावा, उनकी पार्टी, RSP, भी शुरुआती वोटों की गिनती में अच्छी-खासी बढ़त बना रही है। RSP का मकसद देश की राजनीति में पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के दशकों पुराने दबदबे को खत्म करना है। यह चुनाव नेपाल की राजनीति में स्पष्ट रूप से एक ‘पीढ़ीगत बदलाव’ की कहानी लिख रहा है।
5 मार्च को हुआ था मतदान
बता दें कि नेपाल में कल, 5 मार्च को हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स (संसद का निचला सदन) की 275 सीटों के लिए वोटिंग शांति से खत्म हो गई। नेपाल चुनाव आयोग के अनुसार, आम चुनाव में लगभग 60% वोटिंग हुई। देश भर में बनाए गए 10,963 पोलिंग स्टेशनों पर वोट डाले गए। चीफ इलेक्शन कमिश्नर राम प्रसाद भंडारी ने कहा है कि उनका मकसद जल्द से जल्द वोटों की गिनती पूरी करना है। दरअसल 275 सीटों में 165 सांसद फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम के तहत चुने जाते है, जबकि बाकी 110 सीटों पर प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम के तहत फैसला होगा।
Gen-Z के आंदोलन ने बाद पहला चुनाव
गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में Gen-Z के विरोध प्रदर्शनों के बाद देश में पहली बार चुनाव हो रहे हैं, जिसने उस समय के प्रधानमंत्री के.पी. ओली की मिली-जुली सरकार गिरा दी थी। नेपाली लोगों में यह भावना बढ़ रही थी कि पारंपरिक पार्टियों और उनके नेतृत्व की वजह से देश पीछे रह गया है। यही वजह है कि नेपाल में Gen-Z का कड़ा विरोध शुरू हो गया। Gen-Z के विरोध प्रदर्शनों के लगभग छह महीने बाद नेपाल में आम चुनाव हो रहे हैं। यही वजह है कि पुरानी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियां शुरुआती नतीजों में खराब प्रदर्शन कर रही हैं।