मदहोश न हो जाए अर्थव्‍यवस्‍था, इसलिए मंदिर व मस्जिद से पहले खोली जा रही शराब की दुकानें

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नई दिल्‍ली– लॉकडाउन (Lockdown) का दूसरा चरण कल पूरा हो गया. कल दो महत्‍वपूर्ण घटनाएं पूरे देश में हुईं. पहली तो यह हुई कि अस्‍पतालों के ऊपर पुष्‍पवर्षा की गई और दूसरी घटना यह हुई कि ज्‍यादातर राज्‍यों ने घोषणा कर दी कि कल से उनके यहां शराब की दुकानें (Liquors Shops) खुल जाएंगी.

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एक ऐसे समय में जब मंदिरों के कपाट बंद हैं और मस्जिदों में भी लोग नमाज पढ़ने के लिए एकत्र नहीं हो पा रहे हैं, तब शराब दुकानों (Liquors Shops) को खोलने का उत्‍साह दिखाना नैतिक दृष्टि से कुछ अजीब सा लगता है. खासकर ऐसे देश में जहां शराब पीना कानूनी होने के बावजूद सामाजिक बुराई के तौर पर देखा जाता हो, वहां सरकारें शराब दुकान क्‍यों खोल रही हैं.

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घोषणाओं पर नजर डालें तो उत्‍तर प्रदेश में शराब की दुकानें (Liquors Shops) खुल जाएंगी. यहां तक कि रेड जोन में भी शराब की दुकानें खुलेंगी, सिर्फ हॉटस्‍पॉट में ही बंद रहेंगी. हरियाणा में भी कल से शराब (Liquors Shops) की बिक्री शुरू हो जाएगी, बल्कि सरकार शराब पर दो रुपये से लेकर 20 रुपये तक कोरोना उपकर अलग से लेगी. दिल्‍ली का ज्‍यादातर इलाका रेड जोन में है लेकिन यहां भी सरकार ने कल से खुलने वाली शराब दुकानों की सूची जारी कर दी है. छत्‍तीसगढ़ ने एक कदम आगे बढ़कर शराब की होम डिलिवरी तक करने की बात कह दी है. मुंबई में भी शराब की दुकानें खुल रही हैं.

अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी-

अगर हर राज्‍य यह काम कर रहा है तो कोई खास वजह होगी. इसकी सबसे पहली वजह यह है कि शराब भले ही स्‍वास्‍थ्‍य और समाज के लिए खतरा हो लेकिन अर्थव्‍यवस्‍था के लिए यह बेहद जरूरी है और खासकर एक ऐसे समय में जब सारी आर्थिक गतिविधि पर ताला पड़ गया हो तब पाई पाई राजस्‍व के लिए जूझ रही राज्‍य सरकारों के पास इसके अलावा कोई चारा ही नहीं है.

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