केरल में तबाही के बाद अब इस गांव में बचा है केवल एक इंसान…

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बेंगलुरु–करीब 15 दिनों पहले कर्नाटक के हेब्बेटकेरी में सब सामान्य था। यहां लगभग 400 लोग रहते थे। मदिकेरी से लगभग सात किलोमीटर दूर इस गांव में 90-100 घर थे। सारे घर एक दूसरे से जुड़े थे। लेकिन अब सबकुछ बदल चुका है। हालिया दिनों में कर्नाटक में हुई भारी बारिश में यहां लगभग 55 घर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं।

कुछ घर बुरी तरह टूट चुके हैं, गांव के कई लोग राहत कैंप में रह रहे हैं तो कुछ गांव छोड़कर अपने रिश्तेदारों के यहां जा चुके हैं। इस गांव में पहुंचने के लिए अब सुगम रास्ता नहीं बचा है। तीन किलोमीटर के जंगली रास्ते से होकर यहां पहुंचा जा सकता है। यह जंगल का रास्ता भी भूस्खलन होने से बुरी तरह बर्बाद हो चुका है। इस गांव में जब हमारे सहयोगी अखबार की टीम पहुंची तो यहां एक सीए गणपति नाम के व्यक्ति को पाया। सारे लोग गांव छोड़कर जा चुके थे लेकिन गणपति ने अपना घर नहीं छोड़ा। पूरे गांव में इस समय सिर्फ वही अकेले रह रहे हैं। 

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68 वर्षीय कृषक सीए गणपति ने 1987 में यहां अपना घर बनवाया था। गणपति ने कहा, ‘मैंने अपना घर बहुत ही अरमानों से बनाया था। मैंने तय किया कि मैं इसे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा, भले ही मेरा घर तबाह हो जाए या मैं।’ एक हफ्ते पहले गांव में आई रेस्क्यू टीम को भी गणपति ने यही जवाब दिया। यहां तक कि उनके अपने भाई सीए करिअप्पा गांव छोड़कर चले गए और गणपति ने उनकी भी बात नहीं सुनी। 

गणपति ने बताया कि 14 अगस्त को तेज बारिश हो रही थी। हर तरफ तबाही मची थी। लगातार भूस्खलन हो रहा था। शाम को लगभग पांच बजे थे। लोग गणपति के घर पहुंचे और उसे मनाने का प्रयास किया कि वह अपना घर छोड़ दें। 16 अगस्त की सुबह गणपति ने तेज आवाज सुनी। उस मंजर को याद कर गणपित बताते हैं, ‘आवाज सुनकर मैं घर से बाहर आया। मुझे पहले लगा कि शायद मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी हेलिकॉप्टर से हवाई सर्वे कर रहे हैं लेकिन बाहर आकर देखा कि मेरे घर के बाहर बहुत बड़ा भूस्खलन हुआ था। यह खुशकिस्मती थी कि यह भूस्खलन मेरे तीन एकड़ कृषि भूमि की ओर हुआ। ‘ 

इसी दिन दोपहर ढाई बजे एक दूसरा भूस्खलन हुआ, ‘यह भूस्खलन मेरी आंखों के सामने हुआ। मुझे लगा कि अब मैं और मेरा घर नहीं बचेगा लेकिन भगवान ने एक बार फिर हम लोगों को बचा लिया। मेरी आंखों के सामने ही कई घर मलबे में दब गए। हमारी तीन एकड़ जमीन बर्बाद हो गई।

 

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