अखिलेश द्वारा ठुकराई गयी मायावती की इस अपील को अब योगी ने स्वीकारा

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लखनऊ–मायावती ने अखिलेश यादव के शासनकाल में 2012-2017 के बीच कई पत्र लिखे जिसमे उन्होंने इन स्मारकों को संरक्षित करने की अपील की थी, लेकिन अखिलेश यादव ने इन अपीलों पर ध्यान नहीं दिया था। तब मायावती ने खुले तौर पर उन्हे धमकी भी दे डाली थी कि मूर्तियों की अनदेखी का बहुजन समाज उन्हे सबक सिखाएगा।

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लेकिन अखिलेश सरकार के जाने के बाद आखिरकार योगी सरकार ने मायावती की इस अपील को स्वीकार कर लिया है। दरअसल मायावती के शासनकाल में कई मूर्तियां और स्मारक बनाए गए थे, जिसके संरक्षण का मुद्दा हमेशा से ही उठता रहा है, लेकिन अब योगी सरकार ने 22 दिसंबर को मायावती के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। सूत्रों की मानें तो अगले वर्ष 21 और 22 फरवरी को लखनऊ मे होने वाले इंवेस्टमेंट मीट के लिए सभी पार्कों और मूर्तियों को चमकाने का आदेश दिया गया है। तमाम अधिकारियों को इस बाबत निर्देश भी दे दिए गए हैं कि वह इन मूर्तियों व स्मारकों को चमकाएं जिससे कि शहर में दुनियाभर से आने वाले निवेशकों पर लखनऊ की अच्छी छवि बने।

बता दें कि 2002-2007 के बीच उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार ने गुलाबी पत्थरों से स्मारक और मूर्तियों को बनवाने में 45000 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जिसको लेकर उनपर तमाम दलों ने जमकर निशाना साधा था। समाजवादी पार्टी, भाजपा सहित तकरीबन हर दल ने इस खर्च को लेकर मायावती पर निशाना साधा था। यहां तक कि एनजीटी ने भी नोएडा में बनाए जा रहे है पार्क पर आपत्ति जताते हुए इसे पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करार दिया था।

 

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