IND W vs AUS W: पिछले साल वनडे विश्व कप जीतने के कारण महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम से काफी उम्मीदें थीं। इतना ही नहीं हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम को खिताब का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, रविवार को ऑस्ट्रेलिया से मिली हार का मतलब था कि T20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।
रविवार के मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 20 ओवर में कुल 170 रन बनाए, जिसमें कप्तान हरमनप्रीत कौर की हाफ-सेंचुरी अहम रही। छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने 171 रनों का लक्ष्य एक ओवर बाकी रहते ही हासिल कर लिया और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इस मैच में, अपना 10वां वर्ल्ड कप खेल रहीं पेरी ने 38 गेंदों में 56 रन बनाए, जबकि गार्डनर ने 29 गेंदों में नाबाद 53 रनों की शानदार पारी खेली।
IND W vs AUS W: टी20 विश्व कप से भारत बाहर
दोनों ने चौथे विकेट के लिए 100 रनों की साझेदारी की, जिससे ऑस्ट्रेलिया ने भारत पर छह विकेट से जीत हासिल की और उन्हें महिला T20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज से बाहर कर दिया। ऑस्ट्रेलिया 10 अंकों के साथ ग्रुप A में टॉप पर रहा, जबकि भारत 6 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। उसी दिन एक अन्य मैच में बांग्लादेश को हराकर दक्षिण अफ्रीका भी इस ग्रुप से सेमीफाइनल में पहुंच गया। इस हार के साथ ही T20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया। आइए उन पांच कारणों पर नज़र डालते हैं जिनकी वजह से भारत को टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।
टीम इंडिया की खराब फील्डिंग
इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम की फील्डिंग औसत दर्जे की रही। खिलाड़ियों ने मैचों के अहम मौकों पर कैच छोड़े। इसके अलावा, खराब फील्डिंग की वजह से टीम ने एक्स्ट्रा रन दिए, जो आखिर में टीम के लिए भारी पड़े। खराब फील्डिंग के कारण भारतीय गेंदबाज़ विरोधी बल्लेबाज़ों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे।
बेअसर पेस अटैक
इंग्लैंड जैसे हालात में भी—जो आम तौर पर तेज़ गेंदबाज़ी के लिए अच्छे माने जाते हैं—भारतीय तेज़ गेंदबाज़ विकेट लेने के लिए संघर्ष करते दिखे। रेणुका सिंह ने 8.85 की इकॉनमी रेट से कुल दो विकेट लिए। वहीं, क्रांति गौड़ और नंदिनी शर्मा जैसी गेंदबाज़ भी बेअसर दिखीं। हालांकि श्री चरानी ने टूर्नामेंट में 14 विकेट लिए, लेकिन उन्हें तेज़ गेंदबाज़ों से कोई खास मदद नहीं मिली।
India vs Australia: मिडिल ऑर्डर की खराब बल्लेबाजी
हालांकि स्मृति मंधाना और शैफाली वर्मा की ओपनिंग जोड़ी ने कई मैचों में धमाकेदार शुरुआत दिलाई, लेकिन मिडिल ऑर्डर की धीमी बल्लेबाजी भारतीय टीम के लिए महंगी साबित हुई। खासकर जेमिमा रोड्रिग्स बहुत धीमी बल्लेबाजी करती दिखीं, जिसका खामियाजा भारतीय टीम को भुगतना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी जेमिमाह ने 34 रन बनाने के लिए 28 गेंदें खेलीं। मिडिल ओवर्स में बहुत ज़्यादा डॉट बॉल्स खेलने की वजह से भी भारतीय टीम को नुकसान उठाना पड़ा। कप्तान हरमनप्रीत का पूरे टूर्नामेंट में स्ट्राइक रेट सिर्फ़ 131 रहा।
India vs Australia: स्पिनर्स पर ज्यादा निर्भरता
इस वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय टीम स्पिन गेंदबाज़ों पर बहुत ज़्यादा निर्भर दिखी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ स्पिनर्स ने 19 में से 14 ओवर फेंके। तेज़ गेंदबाज़ी के लिए अनुकूल हालात में स्पिनर्स पर भरोसा करना हरमनप्रीत और उनकी टीम के लिए उल्टा पड़ा। टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने जितने भी विकेट लिए, उनमें से 87 प्रतिशत स्पिनर्स ने लिए।
कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में बेरंग नजर आई हरमनप्रीत
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर के लिए यह टूर्नामेंट बल्लेबाज़ी और लीडरशिप, दोनों ही मामलों में फीका रहा। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ़ उनकी कप्तानी साधारण दिखी। इसके अलावा, वह पांच मैचों में बल्ले से सिर्फ़ 141 रन ही बना पाईं। अगर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ खेली गई उनकी 56 रनों की पारी को छोड़ दें, तो बाकी चार पारियों में उन्होंने सिर्फ़ 85 रन बनाए।
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