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बेशर्मी की इंतेहाः ...जब भीड़तंत्र के लिए विक्षिप्त महिला बनी मनोरंजन का साधन

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बलिया--खुद को सभ्य समाज का हिस्सा कहने वाला भीड़तंत्र किस तरह एक मानसिक रूप से विक्षप्त महिला का तमाशा बना देता है। ये देखने को मिला उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के रेलवे स्टेशन पर जहा सैकड़ों की भीड़ एक महिला की मदद के बजाय अपने मनोरंजन के लिए इंसानियत को भी तार तार कर दिया।

बलिया--खुद को सभ्य समाज का हिस्सा कहने वाला भीड़तंत्र किस तरह एक मानसिक रूप से विक्षप्त महिला का तमाशा बना देता है। ये देखने को मिला उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के रेलवे स्टेशन पर जहा सैकड़ों की भीड़ एक महिला की मदद के बजाय अपने मनोरंजन के लिए इंसानियत को भी तार तार कर दिया।

उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के रेलवे स्टेशन पर भी कुछ ऐसा दिखाई दिया जिसने इन्सानियत को शर्मसार कर दिया। दरअसल बलिया रेलवे स्टेशन के बाहर रखे मॉडल इंजन की छत पर एक महिला सोई  हुई थी। उसे सोता देख लोग हैरान और परेशान थे। थोड़ी देर बाद दो पुलिस कर्मी उस महिला को इंजन की छत  से नीचे उतारने में कामयाब हो जाते है। मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला जैसे ही रेलवे स्टेशन के सामने बने पार्क में पहुँचती है भीड़ उसे देखने उमड़ पड़ती है और फब्तियां कसना शुरू कर देती है।

अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही ये विक्षिप्त महिला पार्क के उस डंडे का सहारा लेती है जिस डंडे पर हर साल भारत का झंडा फहराया जाता है। वो अकेले ही पार्क के अंदर से भीड़ का सामना करती है और भीड़ बेशर्मियत की सारी हदें पार करती रहती है। हालांकि सैकड़ों की भीड़ के ड्रामेबाजी को देख जीआरपी के जवान भी है हैरान  हो जाते है और फिर भीड़ को खदेड़कर मानशिक रूप से विक्षिप्त महिला को महिला कोतवाल को सुपुर्द कर देते है। जिसके बाद उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। 

(रिपोर्ट-मनोज चतुर्वेदी, बलिया)

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