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5 दशकों तक जीत का परचम लहराने वाले सुषमा-पासवान सहित ये दिग्गज नहीं लड़ेगें चुनाव

राजनीति
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न्यूज डेस्क -- लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बच चुका है.सभी राजनीतिक पार्टियों ने टिकट बाटने शुरू कर दिए हैं तो दूसरी तरफ गठबंधन को भी अंतिम अमलीजामा पहनाया जा रहा है.

न्यूज डेस्क -- लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बच चुका है.सभी राजनीतिक पार्टियों ने टिकट बाटने शुरू कर दिए हैं तो दूसरी तरफ गठबंधन को भी अंतिम अमलीजामा पहनाया जा रहा है.

इस बीच बड़ी खबर आ रही है कि कुछ दिग्गज राजनेता चुनावी राजनीति से दूर जा रहे हैं जो दशकों तक जीत की गारंटी थे. दिल्ली की सरकार हो या राज्यों की सरकार, सारे समीकरण इनके इर्द-गिर्द ही बनते-बिगड़ते रहे हैं. 

दरअसल हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) अध्यक्ष शरद पवार, भाजपा  नेता व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, भाजपा नेता उमा भारती व राम विलास पासवान की.ये सभी दिग्गज राजनेता अब चुनाव मैदान में नहीं दिखाई देंगें.इसके अलावा लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस है.

 शरद पवार

शरद पवार महाराष्ट्र के उन नेताओं में शुमार हैं, जिन्होंने राज्य की राजनीति को शुरू से अपनी गतिविधियों से प्रभावित किया. साल 1967 में विधानसभा चुनाव में उनकी जीत का जो सफर शुरू हुआ, वह साल 2014 तक जारी रहा. इस दौरान वह तीन बार महाराष्ट्र के सीएम बने. इतना ही नहीं वह केंद्र सरकार में रक्षा और कृषि मंत्री भी रह चुके हैं.इसके अलावा पवार 14 लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. ऐसे में उनका इस बार चुनाव मैदान में न उतरना काफी चर्चा में है.शरद पवार अभी भी राज्यसभा सदस्य हैं.

सुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज 1977 में पहली बार हरियाणा विधानसभा के लिए चुनीं गईं. वे तीन बार विधायक रहीं. चार बार लोकसभा सदस्य बनीं. तीन बार राज्यसभा सदस्य रहीं। इस दौरान वे राज्य और केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहीं. दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं. सुषमा हरियाणा सरकार में 25 साल की उम्र में मंत्री बनीं. किसी भी राज्य में सबसे युवा मंत्री बनने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है. सुषमा 6 राज्यों हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की चुनावी राजनीति में सक्रिय रही हैं. 

रामविलास पासवान

राम विलास पासवान साल 1969 में पहली बार विधायक बन. हालांकि, उनके करियर को धार इमर्जेंसी के दौरान शुरू आंदोलनों से मिली और साल 1977 में वह पहली बार सांसद चुने गए. ये सफर साल 2014 तक जारी रहा. राम विलास पासवान के बारे में कहा जाता है कि उन्हें राजनीति की नब्ज पता होती है. लालू यादव तो उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक तक कहते हैं.

पासवान पटना यूनिवर्सिटी से छात्र नेता से करियर शुरूआत की थी.वे 8 बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं. इस बीच वह एक बार राज्यसभा सांसद भी बने. इस दौरान वह एनडीए से लेकर यूपीए की सरकारों में समय-समय पर कैबिनेट मंत्री रहे हैं. वह ऐसे नेता हैं जो गुजराल, देवेगौड़ा, वाजपेयी, मनमोहन और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाए गए.

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