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कांग्रेस से बढ़ी तल्खी के बाद अमेठी-रायबरेली से भी उम्मीदवार उतार सकते हैं माया-अखिलेश

राजनीति
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लखनऊ -- लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान होते ही सियासी पारा बढ़ता जा रहा है। सभी राजनीतिक पार्टिया अपने-अपने पत्ते खोलने शुरु कर दिए है।

लखनऊ -- लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान होते ही सियासी पारा बढ़ता जा रहा है। सभी राजनीतिक पार्टिया अपने-अपने पत्ते खोलने शुरु कर दिए है।

जहां पहले सपा-बसपा गठबंधन ने अमेठी और रायबरेली की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ीं थीं, अब सपा-बसपा गठबंधन रायबरेली व अमेठी सीट पर भी अपने उम्मीदवार उतार सकता है। हालांकि इस पर अभी तक कोई अधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। 

लेकिन सूत्रों की माने तो गठबंधन में सपा-बसपा के बीच सीटों के बंटवारे में कुछ बदलवा हो सकता है। माना ये भी जा रहा है कि एक-दो सीटों की अदला-बदली को लेकर भी चर्चा हुई है। दरअसल, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार बसपा सुप्रीमो से मुलाकात कर प्रदेश के सियासी हालात पर चर्चा की।इसके अलावा

चुनाव प्रचार व संयुक्त रैलियों समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गईं, बैठक के दौरान कांग्रेस के प्रति तल्खी दिखाई पड़ी। हालांकि, अभी कोई फैसला नहीं हुआ है लेकिन ऐसे संकेत हैं कि रायबरेली व अमेठी सीट पर भी गठबंधन अपने उम्मीदवार उतार सकता है।बता दें कि लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद अखिलेश यादव की मायावती से यह पहली मुलाकात थी। 

दरअसल मायावती इस बात से भी नाराज हैं कि प्रियंका गांधी वाड्रा मेरठ के अस्पताल में भर्ती भीम आर्मी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर से मिलने गईं। 

गौरतबल है कि पश्चिमी यूपी में पहले, दूसरे और तीसरे चरण में अप्रैल महीने में ही चुनाव होने है। पहले चरण की 8 सीटों के लिए 18 अप्रैल से नामांकन पत्र भरने का काम शुरू हो जाएगा। इन सीटों पर 11 अप्रैल को वोटिंग होनी है। समय कम है, इसलिए गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने के लिए मायावती व अखिलेश यादव संयुक्त सभाएं करेंगे।

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