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लखनऊ -- साम्प्रदायिक सियासत का बोलबाला होने के बाद देश का सियासी परिदृश्य बदल गया है जो नेता या पार्टियाँ धर्मआधारित सियासत के खिलाफ चलती थी या चलते थे वह अब धर्मआधारित सियासत का चोला पहनने से नही हिचकिचा रहे है या रही है

लखनऊ -- लोकसभा चुनाव की तारीखे जैसे-जैसे नज़दीक आती जा रही है सियासी तपिश भी बढ़ती जा रही है। यूपी में आज कल रैलियों का रेला चल रहा है जैसे मेरठ में

लखनऊ -- देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में सियासी नज़रिये से बहुत ही कमज़ोर माने जाने वाले मुसलमान के फ़ैसलों पर रोना ही आता है। हालाँकि यूपी में मुसलमानों की आबादी 20% से ज़्यादा है लेकिन उसकी सियासी हैसियत एक बँधवा मज़दूर की बनी हुई है।

---(श्वेता सिंह)

आज मेरे शहर की सड़कों का नजारा कुछ अलग ही था। यातायात व्यवस्था चुस्त- दुरुस्त नजर आ रही थी और जगह- जगह अपने वाहनों के साथ वाहन मालिक ट्रैफिक पुलिस से गिड़गिड़ाते नजर आ रहे थे। 

--लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी 

राज्य मुख्यालय लखनऊ।पाँच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम तो 11 दिसंबर को आएँगे लेकिन एक्ज़िट पोल मोदी की भाजपा के अहंकार को तोड़ते दिखाई दे रहे है क्या देश का सियासी मौसम बदल रहा है ? क्या पाँच राज्यों के चुनावी परिणामों की अँगड़ाई से बदलेगी 2019 की लडाई ?

*लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी*

लखनऊ -- आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सभी सियासी पार्टियाँ अपनी-अपनी सियासी चाल अभी से चल रही है। यूपी में गठबंधन होगा या नही होगा जहाँ इसपर सभी की निगाहें लगी है वही मोदी की भाजपा जो इस समय सत्ता में है