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जुनून सपनों काः कानपुर के किसान का ये बेटा देगा भारत का पहला स्वदेशी वेब ब्राउजर

खास चेहरा
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लखनऊ--हाल के दौर में सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो प्रगति हुई है, उससे  हम सब वाकिफ हैं । इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए दुनिया का अधिकांश भाग जुड़ गया है और सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति ने ज्ञान के नए द्वार खोल दिए हैं। हमारे देश में भी सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।

लखनऊ--हाल के दौर में सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो प्रगति हुई है, उससे  हम सब वाकिफ हैं । इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए दुनिया का अधिकांश भाग जुड़ गया है और सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति ने ज्ञान के नए द्वार खोल दिए हैं। हमारे देश में भी सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।

हमारी आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, व्यवसायिक तथा अन्य बहुत सारे क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी का विकास पूर्ण रूप से दिखाई दे रहा है । इस नए युग में ई-कॉमर्स, ई-मेडिसिन, ई-एजुकेशन ई-गवर्नेंस ई बैंकिंग ई-शॉपिंग आदि डिजिटल माध्यमों का बहुत तेजी से विकास हो रहा है। और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारे देश में विश्व मानचित्र पर अपनी विशेष पहचान बनाने में काफी सफलता भी प्राप्त की है। 

एक तरफ तो हम लोग अपने आप को सबसे प्राचीन और विकसित कहलाने में गर्व की अनुभूति करते हैं। लेकिन अपने रहन-सहन और सुविधाओं के लिए दूसरों को कॉपी करते चले जा रहे हैं। लोगों को आज के वैज्ञानिक युग में नित नए आविष्कारों को देखकर बहुत खुशी होती है। लेकिन आज के कंप्यूटर ,टेक्नोलॉजी और सुरक्षा तकनीक के युग में हम अमेरिकी, चीनी और यूरोपियन कंपनी के सिर्फ गुलाम ही बनते जा रहे हैं। लगातार हो रही डाटा चोरी इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है। 

लगातार हो रही स्पेक्ट्रम घोटाले और आम-आदमी की निजता में हो रहे छेड़छाड़ से निजात दिलाने के लिए और भारत को डाटा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए गो-ब्राउज़र कंपनी के चेयरमैन आशीष यादव (27) ने अपनी दूरदर्शिता और मेहनत के दम पर भारत का पहला पूर्णतया आत्मनिर्भर ब्राउज़र तैयार कर रहे है। यह उनकी काम के प्रति ईमानदार कोशिशों का ही नतीजा है कि आज वह तेजी से हो रही डाटा चोरी के दौर में भी एक पूर्णतया आत्मनिर्भर और देसी ब्राउज़र बनाने में सफल हो रहे हैं और उसे राष्ट्र को समर्पित करने के लिए अपनी सारी तैयारी भी पूरी कर ली है। 

मूल रूप से उत्तर-प्रदेश के कानपुर देहात जिले की पुखराया नामक छोटे से कस्बे के निवासी और कंप्यूटर इंजीनियर में स्नातक आशीष यादव (27) शुरुआत से ही आईटी के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करना चाहते थे । लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी वह देश की सुरक्षा को लेकर दिन-प्रतिदिन नित नए खोज और देश को सुरक्षा दिलाने के के कार्य में और मजबूती से कार्य करते गए हालांकि आईटी सेक्टर की शुरुआत बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से हुई लेकिन अपने सीमित संसाधनों में भी रहते हुए उन्होंने अपनी यह क्रांतिकारी खोज लखनऊ में पूरी की।

देश सेवा को समर्पित जीवनः

यदि किसी शख्स की यह ख्वाहिश होगी समाज के लिए उसे कुछ कर गुजरना है, तो यकीन मानिए 24 घंटे भी कम पड़ जाएंगे तो फिर उसके जज्बे का अनुमान लगाना ही बहुत कठिन है और अगर किसी ने अपने जीवन का लक्ष्य ही दूसरों की सेवा बना लिया हो तो फिर उसका कहना ही क्या ?

बहुमुखी प्रतिभा के धनी और टैलेंटेड टीम की मदद से आज उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है | भगवान में गहरी आस्था के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी उनकी गहरी रुचि है, इसीलिए वह हमेशा समाज सेवा और गरीबों की मदद के लिए जुटे रहते हैं और इसी सेवा भाव के ही क्रम में उन्होंने इस क्रांतिकारी खोज को देश को समर्पित करने का दृढ़ निश्चय किया है, और निकट भविष्य में इसे और भी मजबूत और सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया है |जिससे कि डाटा निर्भरता के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बन सकें और बाकी के मजबूत राष्ट्र हमारे देश की निजता का ना तो हरण कर पाए और ना ही चोरी |

आशीष यादव जी ने बातचीत के दौरान हमें बताया की आज वह इस मुकाम पर अपनी कड़ी मेहनत और लगन के कारण पहुँच पाए हैं | उन्होंने आगे बताया की अगर हम अपने इस प्लान में कामयाब होते है तो हम देश को बहुत सुन्दर और ससक्त ब्रोउस माध्यम प्रदान करने में सफ़ल रहेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी श्रेष्ठतम स्तर पर पहुंचा कर देश के प्रति किये हुए अपने प्रतिबद्धता को पूरा कर सकूँगा | मेरा भावी लक्ष्य डाटा सिक्योरिटी के क्षेत्र में भारत को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाना है |

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