प्रधानमंत्री आवास के नाम पर कर्मचारी जमकर कर रहे घोटालेबाजी

फर्रुखाबाद–एक तरफ योगी सरकार भ्रस्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने की बात कह रही है ।वही प्रदेश में भ्रस्टाचार चरम पर है। सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत के आगे गरीब व रईस में भी कोई फर्क नहीं दिखाई देता है। रईस रिश्वत दे दे तो गरीब बनाकर पात्र घोषित कर दिया जाता है और गरीब के पास देने के लिए रिश्वत न हो तो वह अपात्र बना दिया जाता है ।

मामला फर्रुखाबाद का है ।प्रधानमंत्री आवास देने के नाम पर कर्मचारी जमकर खेल कर रहे हैं। ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रधान को 25 हजार रुपये देने मे असमर्थ ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास के लिए अपात्र हो गया। वहीं तीन मंजिला मकान व ट्रैक्टर स्वामी को पात्र बना कर आवास दे दिया गया।  ब्लॉक की ग्राम पंचायत गदनपुर आमिल मे ग्राम प्रधान रामचक्र व सेक्रेटरी धर्मेंद्रपाल ने गांव के चौकीदार लल्लू  सिंह उर्फ बब्लू का प्रधानमंत्री आवास महज इस कारण काट दिया कि उसने इन लोगों द्वारा मांगे गए पच्चीस हजार रुपये की मांग पूरी नहीं कर पाई। गरीब चौकीदार का नाम सूची से हटा दिया गया। बाद में प्रधान व सेक्रेटरी ने गांव के दिवाकर पाल से पच्चीस हजार रुपये लेकर प्रधानमंत्री आवास दे दिया, जबकि दिवाकर पाल के पास तीन मंजिला मकान, ट्रैक्टर तथा गांव में परचून की दुकान है। लल्लू सिंह जिस मकान में रह रहा है, वह पूरी तरह से खंडहर है। 

बब्लू ने बताया कि प्रधान ने पहले दस हजार रुपये मांगे थे, जो उसने दे दिए। बाद में सेक्रेटरी जांच करने आए तो उन्होंने कहा, पच्चीस हजार रुपया दो। उसने असमर्थता जताई तो बोले की पच्चीस हजार नहीं दोगे, तो आवास नहीं मिलेगा और प्रधान व सेक्रेटरी ने उसका आवास काट दिया। जब इस मामले में जिलाधिकारी मोनिका रानी से बात की तो बताया मामले की जाँच कर कार्यवाही कराएगी ।

(रिपोर्ट – दिलीप कटियार , फर्रुखाबाद )

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