Sawan Somwar 2025: उज्जैन, काशी और हरिद्वार से लेकर देशभर में आज सावन के पहले सोमवार की धूम है। लोग सुबह से ही पवित्र जलधाराओं में स्नान और डुबकी लगा रहे हैं और देवों के देव महादेव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर रहे हैं। शिवालयों और अन्य मंदिरों में बोलेनाथ के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई है। चारों दिशाओं में हर-हर महादेव” का उद्घोष गूंज रहा है।
Sawam ka Pehla Somvar: मंदिरों में उमड़े भक्त
भगीरथ की तपस्या से धरती पर अवतरित मां गंगा के किनारे बसे शहरों, कस्बों और गांवों के पवित्र घाटों पर लोग सुबह चार बजे से ही डुबकी लगाकर भगवान शंकर को जल अर्पित कर रहे हैं। इस बीच, अमरनाथ यात्रियों की कठिन यात्रा जारी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गौरीशंकर मंदिर में तिल रखने की भी जगह नहीं बची है। लोग धैर्यपूर्वक जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ रहे हैं। देश भर के शिव मंदिरों में भी ऐसा ही नजारा है। उत्तराखंड के हरिद्वार में लोग मां गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। यहां के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। तमिलनाडु के दक्षिणी राज्य मदुरै के तिरुपरनकुंद्रम स्थित सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर में कुंभाभिषेक का आयोजन किया गया है।
राजधानी लखनऊ स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया है। गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी हुई हैं। इसके अलावा, ओडिशा के प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने सावन के सोमवार की पूर्व संध्या पर पुरी तट पर रेत से भगवान शंकर की कलाकृति उकेरी।
काशी-अयोध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में भक्त पूजा-अर्चना कर रहे हैं। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वाराणसी के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि कांवड़ यात्रियों के लिए अलग मार्ग की व्यवस्था की गई है। मंदिर के आसपास के इलाकों में ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
Sawan Somwar 2025: बाबा महाकाल का किया गया अभिषेक
सावन के पहले सोमवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। सबसे पहले बाबा को जल से स्नान कराया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों से पंचामृत अभिषेक किया गया। फिर बाबा की भस्म आरती की गई। इस दौरान मंदिर वैदिक मंत्रोच्चार, शंख, घंटियों की ध्वनि से गूंजमान हो उठी।
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