US-Israel-Iran War: ईरान के मिसाइल हमले अमेरिका का USAF E-3 सेंट्री विमान तबाह

US-Israel-Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का आज का एक महीना पूरा हो गया है। मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच रविवार को ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले में अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है। ईरान द्वारा सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर 27 मार्च को किए गए हमले में अमेरिका के 700 मिलियन डॉलर से अधिक महंगे USAF E-3 सेंट्री विमान को तबाह कर दिया।
इसके अलावा, कई हवाई रीफ्यूलिंग टैंकर विमान भी इस हमले की चपेट में आ गए।

US-Israel-Iran War: साउदी एयरबेस पर दिखा मलबा

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रिंस सुल्तान एयर बेस जहां अब तबाह हो चुका E-3 विमान देखा गया था को इस हमले में निशाना बनाया गया था। यह AWACS कमांड-एंड-कंट्रोल विमान, अमेरिका की अन्य सैन्य संपत्तियों के साथ तैनात था। ईरान के ‘प्रेस टीवी’ द्वारा जारी की गई नई तस्वीरों में विमान का मुख्य ढांचा (फ्यूजलेज) पूरी तरह से तबाह नजर आ रहा है, जबकि उसका अगला और पिछला हिस्सा ही सुरक्षित बचा है। इस विमान को अमेरिका की क्षेत्रीय हवाई निगरानी और कमांड क्षमताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह युद्ध के मैदान की “आंखों और दिमाग” के रूप में कार्य करता है।

US-Israel-Iran War: विमान की कीमत 6,600 करोड़ रुपये

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने भी हमले में तबाह हुए विमान की तस्वीरें अपने X हैंडल पर पोस्ट की हैं। फ़्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, हमले से पहले इस बेस पर लगभग छह E-3 सेंट्री विमान तैनात थे। यह एक सर्विलांस विमान है जिसका इस्तेमाल हवा से दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखने और संभावित खतरों का पता लगाने के लिए किया जाता है। ईरानी हमले के दौरान इस महत्वपूर्ण विमान को हुए नुकसान ने इस क्षेत्र में US के हवाई अभियानों की क्षमताओं को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस अकेले विमान की कीमत लगभग $700 मिलियन (₹6,600 करोड़) होने का अनुमान है।

हमला ईरान की सोची समझी साजिश

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हुआ हमला किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं , बल्कि ईरान की व्यापक सैन्य रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है। यह एयरबेस इस क्षेत्र में US के ऑपरेशन्स का एक मुख्य केंद्र है। ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा युद्ध में US वायुसेना इस एयरबेस पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जिससे यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण निशाना बन जाता है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरान का हमला एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद US की हवाई ताकत के मुख्य हिस्सों जैसे कि रडार सिस्टम, संचार नेटवर्क और AWACS जैसे महत्वपूर्ण विमानों को तबाह करना है।

इससे पहले, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया था कि उसने एक US F-16 फाइटिंग फाल्कन और एक MQ-9 रीपर ड्रोन को निशाना बनाया है। ये विमान और ड्रोन, जो ईरान के दक्षिणी हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे, देश की हवाई रक्षा प्रणालियों द्वारा बेअसर कर दिए गए।


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