BMC Election Result 2026: मुंबई सहित महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के लिए वोटों की गिनती जारी है। देश की सबसे अमीर नगर निगम, BMC (बृहन्मुंबई नगर निगम) के नतीजों और रुझानों से यह साफ हो गया है कि मुंबई की सड़कों पर अब सिर्फ ‘मराठी मानुष’ की आवाज़ ही नहीं, बल्कि ‘विकास और संगठन’ की गूंज भी सुनाई दे रही है। जिसे BMC में पहले जहां ठाकरे परिवार की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था, अब वहां महायुति (BJP-शिंदे शिवसेना गठबंधन) ने इतनी बुरी तरह से सेंध लगा दी है। जिससे ‘ठाकरे दुर्ग’ पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन के बारे में नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक DNA का सबूत है।
BMC Election Result 2026: नंबर वन पार्टी बनकर उभरी भाजपा
इन चुनावों में, भाजपा अब महाराष्ट्र में बिना नंबर 1 पार्टी बनकर उभरी है। हिंदुत्व और विकास के कॉम्बिनेशन ने युवा वोटर्स को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया है। ‘डबल इंजन’ की कहानी से आगे बढ़कर, ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार की कहानी अब शहरी वोटर्स के बीच लोकप्रिय हो गई है। देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर खुद को राज्य के ‘नंबर 1 नेता’ और BJP की अगली पीढ़ी के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर स्थापित करने में कामयाब रहे हैं।
महाराष्ट्र के कुल 2869 वार्डों में के रुझानों से पता चलता है कि BJP अकेले ही आधे से ज़्यादा सीटों पर आगे है। अगर इसमें सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना का प्रभाव भी जोड़ दिया जाए, तो महायुति गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के साथ BMC में सत्ता पर काबिज़ होने की स्थिति में है। यह जीत इसलिए भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के ‘मराठी प्राइड’ अभियान को पूरी तरह से नाकार दिया है, जिसे चुनाव में मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया था।
दूसरी ओर, कांग्रेस से दूरी बनाने की कोशिश में उन्होंने अल्पसंख्यक वोट भी खो दिए। उद्धव ठाकरे न तो कट्टर हिंदुत्व समर्थकों को खुश कर पाए और न ही सेक्युलर वोट बैंक हासिल कर पाए। राज ठाकरे के अवसरवादी इतिहास और संगठनात्मक कमजोरी ने ठाकरे गठबंधन को बीच मजधार में छोड़ दिया। अब, महाराष्ट्र की राजनीति में देवेंद्र फडणवीस की असल ‘चाणक्य’ वाली छवि और मज़बूत होगी, जबकि ठाकरे भाइयों के लिए अपना अस्तित्व बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
Maharashtra BMC Elections Result 2026: ठाकरे ब्रांड पर मंडराया संकट
एक दौर था जब ‘ठाकरे’ नाम ही मुंबई में जीत की गारंटी होता था, लेकिन 2022 के विभाजन के बाद यह चमक फीकी पड़ गई है। 2017 के बीएमसी चुनावों में अविभाजित शिवसेना 84 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि भाजपा मात्र दो कदम पीछे 82 सीटों पर रही थी। कांग्रेस को 31, एनसीपी को 9 और मनसे को 7 सीटें मिली थीं। हालांकि, इस बार राज्य की बदल चुकी राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टियों में हुए विभाजन के कारण समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
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