Gyanvapi के ASI सर्वे पर रोक बरकरार, इलाहाबाद HC कल फिर करेगा सुनवाई

वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी (Gyanvapi ) परिसर के एएसआई सर्वे पर लगी रोक को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ा दिया है. कोर्ट में कल यानी गुरुवार को भी इस मामले को लेकर फिर से सुनवाई होगी. ज्ञानवापी का ASI सर्वे पूरा करने संबंधी मामले में बुधवार को कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई लेकिन फैसला नहीं आ सका.

Written By :

SK Sharma

Updated

July 26, 2023

Gyanvapi Case

वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी (Gyanvapi ) परिसर के एएसआई सर्वे पर लगी रोक को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ा दिया है. कोर्ट में कल यानी गुरुवार को भी इस मामले को लेकर फिर से सुनवाई होगी. ज्ञानवापी का ASI सर्वे पूरा करने संबंधी मामले में बुधवार को कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई लेकिन फैसला नहीं आ सका.

सुनवाई के दौरान Asi के एक अधिकारी ने हाईकोर्ट से कहा कि 24 जुलाई की सुबह 9 बजे हमने सर्वे शुरू किया था. अभी तो केवल सर्वे शुरू ही हुआ था कि रोक लग गई. इस पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि आपको और कितना समय चाहिए सर्वे करने के लिए ? एएसआई के अधिकारी ने कहा कि कितना समय एक्जेक्टली लगेगा नहीं मालूम.

ये भी पढ़ें..Weather Update: अगले चार दिनों तक कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, IMD ने जारी किया अलर्ट

ASI ने कहा कि हम 31 जजुलाई तक सर्वे पूरा कर सकते हैं इस पर इलाहाबाद कोर्ट ने कहा कि कोशिश नहीं आप पूरा कीजिए इस काम को 31 जुलाई तक. इस मामले में मुस्लिम पक्ष ने दो दिनों का समय मांगा है. कोर्ट ने कहा कि कल हम इस मामले को सुन सकते हैं. यानि 31 जुलाई तक सर्वे का काम पूरा करने का फिलहाल कोई आदेश नहीं आया है. इससे पहले ज्ञानवापी परिसर के एसआई सर्वे के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई हुई. मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट सैयद फरमान नकवी पूरी और हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन कोर्ट में बहस की.

Gyanwapi

ज्ञानवापी (Gyanvapi ) परिसर का एएसआई सर्वे कराए जाने के मामले में हाईकोर्ट में ASI के एक्सपर्ट बयान देने के लिए पहुंचे. एएसआई के एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर आलोक त्रिपाठी कोर्ट पहुंचे थे. दरअसल कोर्ट एएसआई के एक्सपर्ट से यह जानना चाहती थी कि सर्वे करने पर ढांचे को कोई नुकसान तो नहीं होगा.

एएसआई एक्सपर्ट ने कोर्ट के सामने अपना बयान रखा तो वहीं मुस्लिम पक्ष ने एएसआई सर्वे पर विवादित ढांचे को खतरा बताया और कहा है कि अगर गुंबद के नीचे खुदाई की जाती है तो पुराना भवन ध्वस्त हो सकता है, जबकि हिंदू पक्ष एएसआई सर्वे कराए जाने पर जोर देता रहा ताकि विवादित परिसर को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके. हिंदू पक्ष की दलील थी कि विवादित ढांचा इस्लामिक स्ट्रक्चर नहीं है जिसके बाद कोर्ट मामले में अपना फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की सिंगल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.

भी पढ़ें..कमल बनकर अब्बास ने युवती को फंसाया, फिर रेप कर बनाया धर्मांतरण का दबाव, विरोध पर श्रद्धा की तरह टूकड़े करने की दी धमकी

ये भी पढ़ें.नम्रता मल्ला की हॉट क्लिप ने बढ़ाया सोशल मीडिया का पारा, बेली डांस कर लूट ली महफिल

(अन्य खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं…)